#109

Tu aakhir tak mujhme kisi phool main khusbu ki tarah.

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Main bhe aakhir tak yaheen hun kinhi patoon per oos sa. . . .

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#108

ना भटके है मन मेरा तेरी गली

ऐसा कोई पल गुजरा ही नही

की किसी न किसी दिन

कहीं न कहीं मुलाकात होगी ही

दो पल क़याम करता चलूँ

जो तुम रोक लो दो पल क़याम करता चलूँ

तुम्हारी नज़रो में खोकर मैं शाम करता चलूँ

तेरी दिल्लगी को जाना तो ये दिल की लगी हो

तेरी बातों को सुनना मेरी आशिक़ी हो

न रह पाने का गुमशुम अगर तज़ुर्बा हो तुम्हे 

तो मेरे साथ चलना ओर फासले मुल्तवी हो

तुम्हारी हाथों के छुवन को पैगाम कहता चलूँ

जो तूम रोक ले मुझको दो पल क़याम करता चलूँ

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मिलने की फिर से अगर तेरी ख्वाइश हो

ज़माने भर से हो रंजिश घटा कैसी भी छायी हो

अगर दीदार की खातिर कहीं जाना पड़े तो

थोड़ा तुम सफर करना थोड़ा साथ तन्हाई हो

फिर मिलूं तो तेरे अरमानों का एहतराम करता चलूँ

जो तुम रोक लो मुझको दो पल क़याम करता चलूँ 

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तुम्हारी बाहों के घेरे में मेरा अपना बसेरा हो

तुम्हारी जुल्फों के नीचे मेरा हेर सवेरा हो

तुम्हारी नज़रों में देखूं यहां मैं ये दुनिया सारी

हमेशा साथ रहूँ तेरे मौका चाहे अन्धेरा हो

की बस तुझको चाहने का इल्जाम करता चलूँ 

तेरे बेपरवाह ख्यालों का गुमान करता चलूँ

जो तुम रोक लो मुझको दो पल क़याम करता चलूँ

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©वैभव सागर


#105

तेरे प्यार से फुरसत नही

मेरा मासूम दिल नही रुकता

देख लेना मेरी आँखों में 

मुकम्मल शब्द नही मिलता।

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©वैभव सागर 

#103

तू घड़ी भर और रुक जा

की मेरी ये बात अधूरी है

अभी ठीक से देखा भी नही 

और ये मुलाकात अधूरी है । । ।

#100

बेवजह बातें हमारी तुम्हारी 

मैं तुमको सुनते जाता हूँ

तुम मुझको सुनती जाती हो

मेरे बहुत सवालों का तुम 

एक जबाब दे पाती हो

ये कुछ नहीं तेरा मेरा 

कितना कुछ होता है ना ।

वैभव सागर 

तू मुझसे वाकिफ मैं तुझसे वाकिफ

इक धुप दोपहरी मिलने आना तेरा 

और अंजाम से मैं वाकिफ 

वो मुरझाये गुलाब के फूल तेरे

और उनको चुपके से थमाना तेरा

की उसकी जान से मैं वाकिफ 

खुदको परेशान कह कह के 

मुझको यूँ तड़पाना तेरा 

फिर खुलके हंसना 

या मुस्कुराना तेरा

उस मुस्कान से मैं वाकिफ

तेरी बातें बहुत सारी

कुछ अल्हड सी और कुछ प्यारी

और उनको सुनते जाना मेरा

तेरी हर बात से मैं वाकिफ

कभी मेरी बातों की भी 

तुम तस्वीर बना लेती होगी 

तुम मेरी इश्क़ से वाकिफ

मैं तेरे इश्क़ से वाकिफ

कितनी ही दफा तेरा मैं 

नाम पुकारा करता हूँ

तू मेरी रग रग से वाकिफ

मैं तेरे नाम से वाकिफ । । ।

वैभव सागर

#99

झूठ में वो सच ना कहना

अल्फाज़ मुकम्मल मिल जाये

इक बूँद गिरे दिल के अंदर 

तेरे नाम पे सारा बह जाये.

©vaibhav sagar

Jhuth main bhe wo sach na kehna

Alfaaz mukammal mil jaaye

Ek boond gire dil ke andar

Tere naam pe sara beh jaaye .

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आधा इश्क (प्रारंभ)-1

Era of aadha ishq

Starts from here

Presenting you

Aadha ishq series poems…

Feel the words.

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मेरा हर कदम तेरी ओर बढा

तू एक कदम गर साथ चले

वो पल दो पल का सफ़र 

बस यादों के लिये संजोता हुँ 

माना मैं नही हुँ तुझमे पर 

मैं मेरा आधा इश्क जीता हुँ

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तेरे इंकार की भी हद होगी 

मेरा इजहार भी बेहद निकला

तेरे नज़रों से टकराकर मैं 

जो बेवक्त इक सफ़र निकला

उस सफ़र के मंज़िल को जीता हुँ 

माना मैं नही हुँ तुझमे पर 

मैं मेरा आधा इश्क जीता हुँ

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है आँसू भी इन राहों में शायद

पर तेरा मुस्कुराना गज़ब का है 

पलट के देखना वो मेरा तुझको 

तेरा बड़बडाना अजब नशा है 

आंखे तरेरना और मुझे डराना

उस डर को मैं जीता हुँ 

माना मैं नही हुँ तुझमे पर 

मैं मेरा आधा इश्क जीता हुँ.

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तेरे बिन भी मैं हुँ पुरा 

ना कुछ खाली सा है मुझमे 

ना तुझ बिन कुछ अधूरा 

ना दर्द है ना तुमसे शिकायत 

ना ही दुआ है तू न इबादत 

आंखो के सागर को मैं 

अंदर ही अंदर पीता हुँ 

माना मैं नही हुँ तुझमे 

मैं मेरा आधा इश्क जीता हुँ

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वैभव सागर 

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Feel the words.

Feel the love in the air.