#119

मुन्तज़िर* हूँ की ये रात निकल जाएगी

अकेले रो लूँ तो दिल की बात निकल जाएगी

ए दोस्तों न दिया गया जबाब तुम्हारी बातों का

जो कहीं लब खुले तो बरसात निकल जाएगी।।।

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#117

तुम ख्वाब में कुछ
सामने कुछ और नज़र आती हो
अब मैं ख्वाब को प्यार कह लूँ
या प्यार को ख्वाब

माँ

कल रात वापिस आने पर व्हाट्सएप्प चेक किया ना

तो कितने ही मैसेज ग्रुप्स में और कितने ही स्टेटस

सभी ने अपनी माँ की तस्वीर लगा रखी थी

कल मदर्स डे था ना माँ यानी तुम्हारा दिन

पर माँ मेरा तो रोज ही होता है न एक दिन फिर क्यों

मैं और मेरा हर दिन तो तुम्हारा है न माँ जबसे

छोटा सा मैं और बड़ी मेरी जिद्द को तुम शांत करती थी

रोते यूँ ही कई दफा सो जाया करता था तुम्हारी गोद में

तुम्हारा भी तो हर दिन मेरे लिए होता था ना माँ

झूठी कहानियां सुना कर मुझे खाना खिलाती थी तुम

कई बार डांट देती रोऊँ तो सीने से लगा लेती थी

मेरे हर दर्द को अपना बना के सहा है न माँ

सही गलत की पहचान तो मुझे तुमसे ही मिली थी

मेरे दुखी होने से पहले जान लेना तेरा

या मेरी तबियत खराब होने पर रात रात जागना

मेरा खुदसे भरोसा उठ जाए पर तुम्हारा मुझसे नहीं

कई बार देखा है कई रूप में देखा है तेरा प्यार

कभी चाची, मौसी, दादी, बुआ, दीदी ,भाभी कभी खुद

पर हर बार कुछ नया मिलता है तुमसे मुझे न माँ

कहते हैं समझने लगा हूँ मैं सब मुझे लगता है

पर आज भी तेरे लिए वही नासमझ हूँ न माँ

मिलने पे घंटो जो तुम समझाती हो
उदास बैठु तो तभी फ़ोन करती हो

बिना बोले सब समझ जाती हो
मैं मुकर जाता हूँ ना माँ
पर तुम तो सब जानती हो।।।।।
लव यू माँ।।।। मेरा हर दिन आपका है।।।।

।।।वैभव सागर।।।

#113

वो तो अपना दर्द रो रो कर सुनाते रहे,

हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे,

हमें ही मिल गया खिताब बेवफा का क्योंकि

हम हर दर्द मुस्कुराकर छुपाते रहे।।।।।।।