अधूरा

जितनी तेज़ हो सका उतनी तेज़ गाडी चला कर आया हूँ यहाँ , पर कहाँ मैं नहीं जानता मुझे तो बस भागना था अपने अधूरे होने से सिर्फ भागना। यहाँ भागते भागते थक गया और भागूं भी तो कहाँ किधर। दूर तक फैली अँधेरी सड़क और सिर्फ एक लैंप पोस्ट जो जल और बुझ रही है अनवरत अपने अधूरेपन से और पास लिखा बोर्ड जिसपे आधी रौशनी पड़ रही है “पथ प्रमंडल सीमा समाप्त” । अँधेरे को चीरते हुए कभी कोई तेज़ गाड़ी निकल रही है , सिवाय इसके सब अधूरा है । एक अपनापन सा एक सुकून है यहाँ शायद सबकुछ मेरे जैसे होने से। एक आह निकली और साथ में एक नाम “अनिका” और वहीं अधूरेपन में खो गयी।
मेरी कोचिंग क्लासेज में दो बैच चल रही थी एक मेरी जो की नयी थी और एक पुरानी। सब कुछ सही था जब तक सर दोनों को साथ बैठते उस दिन। ऊपरी वाली क्लास से दूसरे बैच के सारे लड़के लडकियां आ रही थीं हमारे क्लास में और फिर सीढ़ियों से उतारते देखा मैंने उसे , जैसे किसी कवी की आखिरी रचना जो पूर्ण हो , सादगी का सिमट कर मूर्त रूप में आना और उसके होठों के नीचे का तिल जैसे सारी इक्छा पूरी होने वाली हो। इस दिन के बाद सर अक्सर हमारे क्लासेज साथ लिया करते और फिर एक दिन सर ने हमारी क्लासेज हमेशा के लिए मिला दिए और इसकी खबर मुझे मेरे दोस्त ने दी जो शायद मेरे ख्याल से वाकिफ था।
अब तो रोज ही उसको देखा करता और दीवानगी परवान चढ़ने लगी थी। एक दिन सर ने एक सवाल दिया हम सभी को बनाने के लिए जो किसी से नहीं बना सिवाय उसके और उसके विद्वत्ता का भी पता चल गया । जैसे किसी कमल के पत्तों पर चंदन से भींगी ओस की बून्द पड़ी हो, उसको जब सर ने समझने के लिए बुलाया और वो समझती गयी पर मैं बस देखता रहा समझ नहीं सका कुछ भी। बाद में जब मैंने अपने दोस्त से पूछा की कैसे हल करना है उस सवाल को तो दोस्त ने उल्टा सवाल कर दिया की “ध्यान किधर था तुम्हारा काफी अच्छा तो समझा गयी थी”। अब इश्क़ का हाल है पता तो चल जाता है लाख चुप रहो धुआं तो उठ जाता है आग ये वो छुपाये नहीं छुपती बुझाये नहीं बुझती।धीरे धीरे पुरे क्लास को पता चलते गया लेकिन उसे नहीं पता था।
“सुनो क्या तुम मुझे बैंकिंग टर्म्स समझा सकते हो जो कल बताया गया था” ये पहली बार था कि उसने कुछ कहा था मुझे मैं कुछ पल यकीन नहीं कर सका था जो सबको आप कहती है मुझे तुम कहकर संबोधित करना … और इतनी देर में उसने फिर कहा “छोड़ दो अगर प्रॉब्लम है तो”
“नहीं कोई प्रॉब्लम नहीं ” इससे पहले की मैं उसे बताता सर क्लास में आ गए और सर के जाने के बाद मैंने उसे कहा कुछ देर रुक जाओ तो मैं समझा दूँ।
“नहीं रे! घर पर बवाल हो जाएगा टाइम से जाना है टाइम से आना है”
“क्यों माँ खड़ूस है या पापा खड़ूस है जो…”
“नहीं हैं” उसने मेरी मज़ाकिया बातों को बीच में ही काट दिया
“सॉरी, क्या कहा”
“माँ पापा नहीं हैं” बड़ी मुश्किल से मुस्कुरा दी वो ये कहते कहते , आंसुओं को छिपा लिया उसने। उस समय मेरा मन बिलकुल बिद्रोही भावना से घिर गया। पूरी दुनियां से दूर कहीं अपने में छिपा लूँ इसको और फिर कहीं जाने नहीं दूँ।
“सॉरी” कहकर मैं चलते बना । रुकने का सामर्थ्य नहीं था कि उसकी आँखों में देख पाऊं मैं।
मैंने उसकी एक दोस्त से पूछा तो पता चला की उसके सिर्फ एक भाई है जो आवारागर्दी करता है गांव में और वो यहाँ शहर में अपने ममेरे भाई के घर पढ़ती है। अब तो प्यार में सहानुभूति के मिलने से प्यार गहराता गया। अब मैं रोज कोचिंग उसके घर के तरफ से घूमते हुए आता था। मैं उसको चाहता हूँ ये बात उसकी दोस्त ने उसको बता दिया था।
दिन बीतते गए और एक दिन हिम्मत करके मैंने उससे बात करने की सोची पर कह नहीं पाया और ये दिन रोज आने लगें जब मैं घर से सोचकर निकलता था कि आज उसे कह दूंगा की वो मेरी दुनिया बनते जा रही है पर कह नहीं पाया।
एक दिन वो भी आया जब मैंने कह दिया उसके सभी दोस्तों और अपने सभी दोस्तों के कहने के बाद।
“सुनो मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ” मैंने कहा मेरे पैर कांप रहे थे और जुबान लड़खड़ा रही थी।
“मैं जानती हूँ तुम क्या कहना चाहते हो, प्लीज” …
“तुम्हे कैसे पता और अगर पता ही हैं तो क्या जबाब होगा”
“देखो वैभव तुम मेरे अच्छे दोस्त हो सिर्फ इतना और जितना मैं तुम्हारे साथ बात कर लेती हूँ उतना किसी लड़के से नहीं करती।”
“हाँ मैं जानता हूँ की तुम मुझे समझती हो और मैं तुम्हे समझना चाहता हूँ”..
और तभी उसकी दोस्त के आ जाने से हमारी बातें नहीं हुई।
एक वो वक़्त और आज एक रात है, जब मेरा अधूरापन मेरे अंदर तक सुकून देने लग रहा है।
अगले दिन जब हम मिले तो कोई बात नहीं हुई और दो तीन दिन मैंने बात नहीं की।
“सुनो आजकल तुम मुझसे बातें क्यों नहीं करते हो क्या बात है कुछ कहते नहीं, अगर बात वही है तो फिर रहने दो मत करो बात, एक तो तुम थे जिससे बात करती थी ”
बाहर निकलते वक़्त जब उसने ये कहा मैं कुछ कह नहीं पाया , मुझे लगा वो रो देगी।
अगले दिन जब मैं गया तो मैंने बात करनी चाही पर अब वो रूठी थी शायद मेरे डांटने के बाद फिर हमारी बातें शुरू हो गयी।
कुछ दिन के बाद मैंने उसे रस्ते में फिर से कहने की सोची मेरे दिल की बात ” सुनो क्या सोचा है हमारे फ्यूचर के बारे में”
“सोचने जैसा क्या है जल्दी जल्दी सबको जॉब लेना है”
“अच्छा, अगर मैं जॉब ले लूँ तो क्या तुम मुझे मिल जाओगी”
“तुम बार बार ये टॉपिक क्यों उठाते हो, तुम मेरे अच्छे दोस्त हो, क्या चाहते हो मैं कोचिंग आना छोड़ दूँ। ”
उसकी इस बात का अब मेरे पास कोई भी जबाब नहीं था, कैसे कह दूँ की अब उसको मेरी आवाज सुनाई दे। बस अब मैं नहीं कहूंगा कुछ भी सोचकर मैंने घर की ओर कदम बढ़ा लिए।

अगले दिन सबकुछ ठीक था, हमारी थोड़ी बातें हुए और फिर उसने जाते जाते कहा
“अगर सचमे जॉब लग गयी तो मैं घर पर बात कर सकती हूँ”
अब इससे मुझे नयी ऊर्जा मिल गयी।
उसका फ़ोन नंबर तो उसकी सहेली से पहले ही ले लिया था पर कभी फ़ोन नहीं किया क्योंकि उसने मना किया हुआ था।

“सुनो , क्या हुआ है दो दिन से दिखाई नहीं दी गांव चले गयी है क्या घूमने ”
“नहीं उसने यहाँ पढ़ाई छोड़ दी, वो बाहर चले गयी है पढ़ने ”
काफी सुन्न सा पढ़ा हुआ था मैं सुनकर उसकी दोस्त से की वो यहाँ से चली गयी है , उस दिन सबकुछ अपने आप अजीब सा लग रहा था।
सब कुछ सही था दोस्त थे हंसी मजाक हो रही थी पर कुछ तो था जो बिलकुल ही अजीब लग रहा था, सुना लग रहा था।
घर जाते ही मैंने मोबाइल उठाया और छत पर चला गया, सोचा कॉल करूँ पर नहीं कर पाया, नीचे आ गया और वापस से छत पर चला गया
“हेलो”
एक मीठी आवाज सुनके दिल में धौकनी सी चलने लगी, आवाज मेरे कानों तक आ रही थी, दो सेकेंड बाद फिर से जब उसकी आवाज आई “हेलो कौन”
“मैं हूँ ” पर मुझे अपना नाम बोलने की समझ नहीं थी उस वक़्त।
“कैसे हो वैभव ”
“मैं ठीक ही हूँ , तुम बताओ कैसी हो ”
“बस बढियां”
“हाँ वो तो होगा ही यहाँ से चली जो गयी हो ”
“अरे नहीं रे , मन नहीं लग रहा दो दिन से सब नए हैं , पर नानी घर है तो थोड़ा अच्छा लग रहा है ”
“हाँ अब हमारे साथ पढ़ने में मन थोड़ी न लगेगा ”
“ऐसा नहीं है , यहाँ आयी हूँ जॉब लगेगी तो आगे कुछ सही तो होगा , यहाँ बेहतर सुविधा है पढ़ने की ”
“हाँ , वो तो है ही”
“अच्छा सुनो नंबर तो है तुम्हारे पास पर कभी कॉल मत करना मैं ही करुँगी प्रॉमिस ”
“अच्छा ठीक है मैं इंतज़ार करूँगा ”
“कितना नेगेटिव सोचते हो रे सब सही होगा”
“हाँ वो तो भरोसा है , पता है”
“नानी इधर आ रही है, बाय”
“सुनो….”
कॉल कट चूका था , मैं कही न कही अंदर से संतुष्ट था , खुश था पर कितना कुछ बोलना था जो रह गया ।

लगभग पंद्रह दिन बाद उसकी दोस्त ने मुझे रस्ते पर रोक कर कहा “कैसे हो”
“ठीक हूँ तुम बताओ”
“मैं ठीक हूँ तुम्हे पता है अनिका की शादी फिक्स हो गयी है”
“क्या चलो जो भी… ”
कहकर मैं चल दिया मुझे उस बात को और सुनने या समझने की ताकत नहीं रही थी।
सब शायद झूट हो बस पंद्रह दिन पहले ही तो बात हुई थी।
हाऊ अर उ ? लिखकर मैंने उसे मेसेज कर दिया।

दो दिन बाद कॉल आया
“हेलो , कैसे हो”
“मैं ठीक हूँ सुना है तुम्हारी शादी तय हो गयी है”
“हाँ , हो तो गयी है , आ रहे हो न शादी में ”
“देखता हूँ एग्जाम है शायद ना आ पाऊं … चलो ठीक है मैं करता हूँ फिर तुमको ”
मैंने फ़ोन कट कर दिया . अजीब सी शांति अजीब सा सुकून था तभी मन में। न जाने क्यों सब कुछ अपना सा लग रहा था। हर कुछ टूट रहा था और फिर मुझमे मिलते जा रहा था।

“सुनो मेरी शादी में सिर्फ तीन दिन बचे हैं आ रहे हो ना प्रॉमिस करो”
“देखता हूँ , पर ऐसा क्या हो गया कि”
“कुछ नहीं लड़का काफी अच्छा है ”
“तो मैं कौनसा बुरा था” बिलकुल माजकिये लहजे में मैने कहा
“अच्छा क्या सचमे तुम हमारे बारे में सीरियस थे ”
“तो मैं कैसे … , खैर छोरो.. कोशिश करूँगा आने की पर प्रोमिस अब नही कर सकता ” और मैंने फ़ोन कट कर दिया।
क्या मैं सचमे नहीं समझा पाया था उसे अपना प्यार , क्या गलती थी मेरी।

आज उसकी शादी हो रही है। मैं जाने के लिए निकला पर इतनी फिल्मों वाली आशिक़ी नही है मेरे अंदर, मैं जाके उसे हँसते हुए नहीं देख सकता ।
जितनी तेज़ वापस गाड़ी चला सकता था जहां तक चला सकता था वहां तक चला के आया हूँ।।
अब सुकून है दिल में अधूरेपन का, अधूरे एहसास का।
अधूरा होने का सुकून।।।।।।

।।।इति।।।

Advertisements

10 second silence

when i saw you

I was nervous to tell you

It was not a feeling the same 

But you know that 

You helped me a lot to reach out

And as the wise man says 

You can makes your goal

But destiny decides the rest 

And

That beauty of our friendship

Was so good 

One day i decided to tell you 

And i did

But you refused.

Me again and again but politely

I thought you were also loveing me the same way

And one day when i purposed you for the last time or last try

I got a 10 second silence. . .

©vaibhav sagar

Love the way

I love the way you smile

Love the way you say it

I love that unique style

Love that word “don’t know”

and after that your wraped face

To which i always wanna kiss

The pink and gray your lips

And your anger with that ego

Attitude makes you perfect to go

For a long journey of life with me

I promise i ll never flee

To the way you care for me

And all the day you miss me

That word love you won’t accepts

And long long gossips .

i love the way you say that

You were are will be there for me

Since for whenever i need.

So, i found the reason to trust you more

To miss you more 

and the way you love me

I love that way more.

.

©vaibhav sagar

आओ एक शाम बैठो नदी के किनारे 

आओ एक शाम बैठो नदी के किनारे 

जो है तो बेवजह आओ वक़्त गुजारे 

मैं बातें फिर सारी तुम्हारी करूँगा 

तुम मुझको सुनती जाना 

मैं तेरे मन की कहता जो जाऊं

तुम मेरा मन भी पढ़ती जाना 

इठलाना और मुझसे दूर भागना

और तेरे पीछे मैं दौडूं तेरा नाम पुकारे 

आओ एक शाम बैठो नदी के किनारे

.

जो चाहो तो भर लेना मुझको बाहों में अपनी 

या फिर यूँ ही मेरी ओर देख मुस्कुराना 

की आँखों के इशारे तेरे पढ़ जो लूंगा

तूम मन ही मन सब कहती जाना 

या गर चाहो जो तो मैं दूर नज़र आऊं

पर क्या होगा गर घबराहट मेरी बातें बिगाड़े

आओ एक शाम बैठो नदी के किनारे

.


तेरी अधरें जो कांपी तो अपनी से छु लूंगा 

 हमारे मिलने की बातें सरेआम कह दूंगा 
और तुम मेरे लब पे अपने लब रखो 

की ऐसी रिसवत जो मुझे चुप कराये 

कोई पूछे तेरी हालात तो मेरा नाम दो बताये 

और अगली बार मिलने घंटो खुद को सवारे

आओ एक शाम बैठो नदी के किनारे । । ।

©वैभव सागर 

#100

बेवजह बातें हमारी तुम्हारी 

मैं तुमको सुनते जाता हूँ

तुम मुझको सुनती जाती हो

मेरे बहुत सवालों का तुम 

एक जबाब दे पाती हो

ये कुछ नहीं तेरा मेरा 

कितना कुछ होता है ना ।

वैभव सागर 

वो अनकहा सा प्यार -1

​पहला दिन पहली नज़र 

मासूम हँसी और 

दिल का मेरे इकरार

वो अनकहा सा प्यार

.

बातें हुइ चंद यादें हुइ 

कुछ खोया खोया लगता था

मुझमे ही तो थी मैं पर

मन सोया सोया रहता था

मुझे झ्झोडा जिसने वो था

एक शर्मीला मेरा यार 

वो अनकहा सा प्यार 

.

था फर्ज हिलोरे मारता

वतन की मोहब्बत कौन जानता

आन्धियां चली मेरे मन में

वो जा रहा था दुर कहीं 

बस आँसू ही थे बिछडन में

थी बातें जुबान पर कयी

पर लब खुल ना पा रहे

बस इतना तो पूछूँ मैं 

“सच मुझे छोडकर जा रहे?”

दिलों में था जो इंकार 

वो अनकहा सा प्यार

.

पलट के भी ना देखना

आँसुओं की कीमत पायी है 

है कोरा सच ये बिल्कुल

इसमे थोडी रुसवाई है 

अगर पलटी मैं या पलटा वो

तो शायद सब थम जाता

जी लेते मिलकर हम 

तो क्युँ ना पलटू इक बार

ये था अनकहा मेरा प्यार
वैभव सागर

.

.Story by :- kajal singh

Poem by :- vaibhav sagar 

इक पगली लड़की है

है राह नही ना ही मंज़िल 

बस राही मेरी दोस्त है वो 

एक झल्ली सी लड़की है 

सब पूछे तेरी कौन है वो

. . .

अफ़साने कितने अंजाने हैं 

कुछ नये हैं  कुछ पुराने हैं

कुछ बनते बनते बन जाते

कोई कहते कहते पूछे वो 

इक लड़की देखी थी पागल 

मुझको बता तेरी कौन है वो 

है जबाब नहीं इन सवालों का

बस इक लाचारी सी लगती है 

पर उस पगली की बातें फ़िर 

इन सब पर भारी लगती है 

है नासमझी की हर हद वो

जो बैठ कभी समझूँ उसको 

खुदसे पूछूँ मेरी कौन है वो

. . .


. . .

जब चाहत की बातें आती हैं 

मेरे सर की नस दुख जाती है 

नासमझ मुझे समझाती है 

मैं बातों में बहका जाता हुँ 

और पागल मुझे बेहकाती है 

है दुनियादारी की सारी समझ 

दुनियां के लिये अन्जान है वो 

तू इससे पहले फ़िर पूछे की 

मुझसे मेरी ही पहचान है वो 

तूने जो पगली लड़की देखी है

मेरी दोस्ती का प्यारा नाम है वो . . .

. . .

वैभव सागर

. . .

yes, a boy and a girl can be a good friend… 

All we need to change our mind and our thoughts, just respect as a girl and treat as a friend.

Note it down that one good friend is beeter then 1000 sham friends.

I am mirror

I am water, I am mirror

My eyes confess the secrets of heart

And i always let them pass through

If it burns to make me reflect 

The darkness and sorrow , oh,

I am shadow, I am mirror

A mirror of art to see my soul

To bring out reality and to smile

All the reflection is the same 

That i put into myself, oh

I am sky, I am mirror

With lot of deepness  and stars but

Never think longer before the reflection

If you are normal, you are real then 

I am normal but i am fake

With every tears of sorrow, oh

I am me , i am the mirror. . .

zindagi Hai na (ज़िंदगी है ना)

A must read poem by me. . . Please read and comment. . . 

manzile hain saamne

मंज़िलें हैं सामने 

raaste per nahe 

रास्ते पर नही 

hai saath mere 

है साथ मेरे 

Tu dikhe gar nahe 

तू दिखे गर नही 

Thaame ungli meri

थामें उँगली मेरी

tu chal di jahaan 

तू चल दी जहाँ 

zindagi . . . ज़िंदगी …

tu hai na  . तू है ना…

hwaon main lipti

हवाओं में  लिपटी 

Hai aahat teri

है आहट तेरी 

Sarsarati hai tu

सरसराती है  तू 

her mood per

हर मोड पर

bekhuof  chalti hai

बेखौफ चलती है 

her kadam chode nishaan

हर कदम छोडे निशां

Zindagi. . . ज़िंदगी 

tu hai na . तू है ना …

is gali se us gali

इस गली से उस गली 

her shouk ki kahani

हर शौक की कहानी

Jubaan hai teri

जुबां है तेरी 

jakhm or nishani

जख्म और निशानी 

sang fire kahaan kahaan

संग फिरे कहाँ कहाँ 

aye meri zindagi

ए मेरी ज़िंदगी 

Tu hai na . तू है ना…

girta hun mai

गिरता हुँ मैं 

sambhal leti  hai tu

सम्भाल लेती  है तू 

meri her kahaani

मेरी हर कहानी

ka hissa hai tu

का हिस्सा है तू 

Hai sath chunaa

है साथ छुना

mujhe tera aashmaan

मुझे तेरा आसमान

Zindagi . . . ज़िंदगी . . .

तू है ना . 

Tu hai naa.

Vaibhav सागर

…………………………………………………………….

“Open your arms to change, but don’t let go of your values.” – Dalai Lama…