डूब जाऊँ मैं 

है बातें तेरी एक उलझन 

उलझ तुझको निहारू मैं 

ये आंखे झील है तेरी 

जो इनमे कूद जाऊँ मैं 

तू चाहे पार कर देना

या शायद डूब जाऊँ मैं .

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तेरी लटें काली बदरी 

तेरे चेहरे पे आती है 

तू बार बार सवारे इसे 

ये खुली खुली इठ्लाती है 

अदाओं पे सवर जाऊँ मैं 

तू चाहे पार कर देना

या शायद डूब जाऊँ मैं 

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उभरे हुए हैं गाल तेरे 

और सुर्ख गुलाबी होंठ 

खिलखिलाती तेरी हँसी 

थोडी पागल वाली सोच 

जिनमे टूट बिखर जाऊँ मैं 

तू चाहे पार कर देना 

या शायद डूब जाऊँ मैं .

©वैभव सागर

आधा इश्क (प्रारंभ)-1

Era of aadha ishq

Starts from here

Presenting you

Aadha ishq series poems…

Feel the words.

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मेरा हर कदम तेरी ओर बढा

तू एक कदम गर साथ चले

वो पल दो पल का सफ़र 

बस यादों के लिये संजोता हुँ 

माना मैं नही हुँ तुझमे पर 

मैं मेरा आधा इश्क जीता हुँ

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तेरे इंकार की भी हद होगी 

मेरा इजहार भी बेहद निकला

तेरे नज़रों से टकराकर मैं 

जो बेवक्त इक सफ़र निकला

उस सफ़र के मंज़िल को जीता हुँ 

माना मैं नही हुँ तुझमे पर 

मैं मेरा आधा इश्क जीता हुँ

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है आँसू भी इन राहों में शायद

पर तेरा मुस्कुराना गज़ब का है 

पलट के देखना वो मेरा तुझको 

तेरा बड़बडाना अजब नशा है 

आंखे तरेरना और मुझे डराना

उस डर को मैं जीता हुँ 

माना मैं नही हुँ तुझमे पर 

मैं मेरा आधा इश्क जीता हुँ.

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तेरे बिन भी मैं हुँ पुरा 

ना कुछ खाली सा है मुझमे 

ना तुझ बिन कुछ अधूरा 

ना दर्द है ना तुमसे शिकायत 

ना ही दुआ है तू न इबादत 

आंखो के सागर को मैं 

अंदर ही अंदर पीता हुँ 

माना मैं नही हुँ तुझमे 

मैं मेरा आधा इश्क जीता हुँ

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वैभव सागर 

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Feel the words.

Feel the love in the air.

वो अनकहा सा प्यार -1

​पहला दिन पहली नज़र 

मासूम हँसी और 

दिल का मेरे इकरार

वो अनकहा सा प्यार

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बातें हुइ चंद यादें हुइ 

कुछ खोया खोया लगता था

मुझमे ही तो थी मैं पर

मन सोया सोया रहता था

मुझे झ्झोडा जिसने वो था

एक शर्मीला मेरा यार 

वो अनकहा सा प्यार 

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था फर्ज हिलोरे मारता

वतन की मोहब्बत कौन जानता

आन्धियां चली मेरे मन में

वो जा रहा था दुर कहीं 

बस आँसू ही थे बिछडन में

थी बातें जुबान पर कयी

पर लब खुल ना पा रहे

बस इतना तो पूछूँ मैं 

“सच मुझे छोडकर जा रहे?”

दिलों में था जो इंकार 

वो अनकहा सा प्यार

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पलट के भी ना देखना

आँसुओं की कीमत पायी है 

है कोरा सच ये बिल्कुल

इसमे थोडी रुसवाई है 

अगर पलटी मैं या पलटा वो

तो शायद सब थम जाता

जी लेते मिलकर हम 

तो क्युँ ना पलटू इक बार

ये था अनकहा मेरा प्यार
वैभव सागर

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.Story by :- kajal singh

Poem by :- vaibhav sagar 

मोहब्बत नाम हो जाये

After a hard time again ,I am  inspired by reading aastha gangwar Posts and by call and texts of mayank bhai .Thank you . . और आपलोगों के लिये खास मोहब्बत नाम हो जाये. . .

तेरे इश्क में मेरा ये इल्जाम हो जाये जो देखूँ तुझको तो मोहब्बत नाम हो जाये

तुझे ढूँढू दर-ब-दर और पालूँ सपनों में ना खोना चाहूँ बस रहना साथ मेरे 

तेरी आंखोँ में जो देखूँ आईना नज़र आये तुम्हारी मासूमियत का भी मोहब्बत नाम हो जाये

तेरी जुल्फें तेरी आंखेँ तू और तेरी बातें मुझे याद आती है तेरे जाने पे तेरी साँसें

तेरी आवाज से मिलकर मेरे अल्फाज गीत बन जाये

दो चार बातें फ़िर करलुं  चर्चे दिवाने आम हो जाये हमारी दीवानगी का भी मोहब्बत नाम हो जाये

तू चले , मैं धूल बनू उड़ जाऊँ हवाओं में तुझसे 

तेरी एक छूवन का एहसास मेरे रोम रोम में बस जाये

तुझको रब मान माँगू तुझी से तू मिल तो ख्वाब मुकम्मल हो जाये

जो तुम हसने लगों बातों से मेरी दो पल यहीं पर रुक जाये

तुम मुझमे मिल जाओ ऐसे की मोहब्बत नाम हो जाये

कभी मेरी किताबों के भी पन्ने चार तुम देख लेना 

हमारे मिलने की बातें कभी  सरेआम तुम कह देना

थोडा मैं बदनाम हुँ इश्क में थोडा तू भी बदनाम हो जाये

हमारे खूबसूरत इश्क का फ़िर मोहब्बत नाम हो जाये. . . 

To be continued. . . 

वैभव सागर

Main ranjha tu heer hai.

main hun ranjha janeman tu heer hai
sisha-ye-dil ki mere taswewer hai
..
pawon min jo tune daal di
kya hansi julfon ki zanjeer hai

rasq kiya karte hai mujhse dost
wo pari wash gar meri takdeer hai
….
paas hai jiske juban ki chasni
wo sukhan wo anjuman ka heer hai
…..
isq ki duniya bhe ajeeb hai dost
jisko bhe dekho yahan dilgeer hai
……
pyar ka ijehar to kar he chuke
kisliye fir wasal main takheer hai
…….
katal ho jaunga fir shok se main
unke hathon main agar samsheer hai
……..
kis liye soupun tujhe main dard e dil
dard ye fursat to meri jagir hai
………
aye najooomi dekhkar mujhko bata
kya mere khwaboon ki wo tabiir hai
………

image

ye jo hothon pe tumhare hai hansi
Kya kisi ke isqq ki taseer haii
……….
Ho sakta hai iska muhabbat ilaj
warna isq to rog he gambheer hai
……………
I was searching my page reading my old posts and i found this..
Love to share with you …

#81

kisi ne pucha kyu karte ho itni mohabbat jab deedar ko taras jate ho.
uske pyar ko taras jate ho..
maine bhe keh diya intezar kiya hai tabhe to pyar kiya hai.
kabhe khud ko bhe rula kar dekho sukun milega.

breathless

Mohabbat ho jaye -2

Hum chahte hi nahi ki muhabat ho jaye,
karogi muhabat to chere pe udasi chayegi,
jo chayegi udasi tujhe,
nind na aayegi to chere pe asar aayega,
chere pe asar aayega to tum najare churaogi ,
phir na jane kab tak mujhse milne na aaogi,
tum milne na aao mujhase aaisi nobat hi kyon
aaye,
hum chate hi nahi muhabat ho jaye
Karogi muhabat to kuch yun muhabat hogi,
kabhi sak hoga mujh pe kabhi sikayat hogi
jinse vasta nahi adavat hogi,
sahar se nafrat duniya se bagawat hogi,
mera naam lekar log tujhe bulayge,
en harkato se ek din ukta jaogi,
mujhe pathar ki tarha thukra jaogi,
tum thukrao mujhe aaisi nobat hi kyon aay hum ,
Krogi muhabat to roz mulakat hogi,
waqt jaya hoga fizul baat hogi,
saam ko taane denge kuch log,
ghar phuncte-2 raat hogi,
puchenge gharwale to kya btaogi,
jhooth bologi ya khamosh ho jaogi,
soch kar din ki baato ko muskuraogi raat bhar,
nind na aayegi tumhe jagogi raat bhar,
chid chidi ho jaogi jab dost chidayge,

hum chate hi nahi muhabat ho jaye
hum sah jayege tum na sah paogi,
kaise zamane ke sitam uthaogi,
samajayege gharwale to mujh se khafa ho jaogi,
main tanha rah jauga tum bewafa ho jaogi,
tum ho jao bewafa aaisi nobat hi kyon aaye,
hum chate hi nahi muhabat ho jaye

Kuch to hai tu badal gaya hai

Wo teri ankhon k khawb sary wo batin sari hisab sary swal sary
Jwab sary
Wo khushain sari
Azab isary
nsha tha jo wo utr giya hy,
.
KUCH TO HAI TU BADAL GYA HAI!

Jo tery milny ki arzo thi
Jo tujko pany ki justju thi
Hui jo chahat abi shuro thi
Jo teri ankhon main roshni thi jo teri baton ki rangini thi
Jo teri sanson ki tazgi thi
Jo try lehjy main chashni thi wo sra meetha pighal gya hy
.
KUCH TO HY TU BDAL GYA HY’

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By : Vaibhav Sagar

कोई दीवाना कहता

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!

मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!

समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!

भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा!
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा!!
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का!
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा!!
By: कुमार विश्वास

By : Vaibhav Sagar