#108

ना भटके है मन मेरा तेरी गली

ऐसा कोई पल गुजरा ही नही

की किसी न किसी दिन

कहीं न कहीं मुलाकात होगी ही

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मोहब्बत नाम हो जाये

After a hard time again ,I am  inspired by reading aastha gangwar Posts and by call and texts of mayank bhai .Thank you . . और आपलोगों के लिये खास मोहब्बत नाम हो जाये. . .

तेरे इश्क में मेरा ये इल्जाम हो जाये जो देखूँ तुझको तो मोहब्बत नाम हो जाये

तुझे ढूँढू दर-ब-दर और पालूँ सपनों में ना खोना चाहूँ बस रहना साथ मेरे 

तेरी आंखोँ में जो देखूँ आईना नज़र आये तुम्हारी मासूमियत का भी मोहब्बत नाम हो जाये

तेरी जुल्फें तेरी आंखेँ तू और तेरी बातें मुझे याद आती है तेरे जाने पे तेरी साँसें

तेरी आवाज से मिलकर मेरे अल्फाज गीत बन जाये

दो चार बातें फ़िर करलुं  चर्चे दिवाने आम हो जाये हमारी दीवानगी का भी मोहब्बत नाम हो जाये

तू चले , मैं धूल बनू उड़ जाऊँ हवाओं में तुझसे 

तेरी एक छूवन का एहसास मेरे रोम रोम में बस जाये

तुझको रब मान माँगू तुझी से तू मिल तो ख्वाब मुकम्मल हो जाये

जो तुम हसने लगों बातों से मेरी दो पल यहीं पर रुक जाये

तुम मुझमे मिल जाओ ऐसे की मोहब्बत नाम हो जाये

कभी मेरी किताबों के भी पन्ने चार तुम देख लेना 

हमारे मिलने की बातें कभी  सरेआम तुम कह देना

थोडा मैं बदनाम हुँ इश्क में थोडा तू भी बदनाम हो जाये

हमारे खूबसूरत इश्क का फ़िर मोहब्बत नाम हो जाये. . . 

To be continued. . . 

वैभव सागर

रात अधूरी बीत गयी

कुछ दाने है बिखरे मनके 

क्यू रात अधूरी बीत गयी 


जो बात छुपी थी मेरे मन में

वो बात अधूरी बीत गयी 

टपक पडे आंखोँ से मोती

सारा रंग उनमें धो डाला

कुछ रंग मिला बेरंग सही 

और याद निगोडी बीत गयी

कितना कुछ था कहने को 

और रात निगोडी बीत गयी

अब तुम बिन मैं कैसा हुँ 

बस तारों के जैसा हुँ 

है साथ सभी सपने मेरे 

पर मंज़िल आते भोर हुइ

हो रात मेरी तुम काली शायद 

हर बार तुम्हारी जीत हुइ

कितना कुछ था कहने को 

और रात निगोडी बीत गयी

कुछ वादें थे हमको करने 

कुछ लम्हे साथ बिताने थे

उलझा के नैनों को तुझमे 

हमको सरग़म बनाने थे

पर रात हमारी सौतन थी

दो घडी में ही बीत गयी 

हम मिल न सके देखो फ़िर 

क्यू रात अधूरी बीत गयी. . .

बहुत कुछ बोलती है आंखे

बहुत कुछ बोलती है आंखे

जो तुम सुन सको अगर 

इशारों में तोलती है आंखे

जो समझ सके अगर 

नूरानी ख्वाबों के साये

लिये कयी अरमाने दिल 

कुछ गहरा सा साजिश 

घोलती है आंखे

बहुत कुछ बोलती है आंखे

तुम्हारे सागर का किनारा 

कहीं डुबा सा है इनमे 

लिये सैलाब है कोई या 

लहरों की सरगमें 

कहीं कश्ती को किनारा 

इनमे नही मिलता 

खुद खो कर पार

लगाती है आंखे

बहुत कुछ बोलती है आंखे

ये काजल जो लगी इनमे 

इससे शामें उधार लूँ 

तेरे नैनो में देख

जिन्दगी गुजार दूँ

कही नैनो का इशारा

नैनो से हो जाये तो 

नैनो से तोलती है आंखे

बहुत कुछ बोलती है आंखे.

वैभव  सागर

Muskurahat mujhe de do

Choti si ek aadat mujhe de do

Tum apni muskurahat mujhe de do

Main apni baten sari

Fir tumse kahungaa

Tum sunne bhar ki 

mohlat mujhe de do

Ek choti si aadat mujhe de do

Tum apni muskurahst mujhe de do

kayi baar manga hai

Jamane bhar ki khusiyaan

Intezaar ke bhe hai 

Kuch thodi chand ghadiyaan

aao saath baitho ek nazar de do

Choti si ek aadat mujhe de do

Tum apni muskurahat mujhe de do

Padhne do tere chehre ko

Ye ada ye banawat mujhe de do

Dhup sunahri ab satane lagi hai

apni julfon ka ghunghat de do

choti si ek aadat mujhe de do

tum apni muskurahat mujhe de do

तू देखे आइना और मैं नज़र आऊँ 

तेरी रूह में मैं कुछ यूँ उतर जाऊँ 

तू देखे आईना और मैं नज़र आऊँ 

तेरी हर ख्वाहिस अपनी दुआ मानकर 

तेरे नैनो में खो जाऊँ और खोकर मुझमे 

तू देखे आईना और मैं नज़र आऊँ 
तू चाहे बारिश मैं बरस जाऊँ 

हवा बनकर मैं तेरी जुल्फें सेहलाऊँ

तू चेहरा सामने कर मैं इसको पढ जाऊँ

मुझमे बस जा तू मैं तुझमे बस जाऊँ

तू देखे आइना और मैं नज़र आऊँ 
तू इशारा कर दे जो मैं मर जाऊँ 

तेरी इक मुस्कुराहट पे कुछ ऐसा कर जाऊँ 

तू हर घडी सोचे मैं हर पल याद आऊँ 

एक छोटी ख्वाहिस तेरा इश्क जी पाऊँ 

तू देखे आइना और मैं नज़र आऊँ.

Vaibhav sagar

teri rooh main mai

Kuch yun utar jaaun

Tu dekhe aaina or

Main nazar aaun

Teri har khwaish 

Apni dua mankar

naino main kho jaaun

Or khokar mujhme 

Tu dekhe aaiena or

Main nazar aaun
Tu chahe baris 

Main baras jaun

Hawa bankar main

Teri julfen lahraun

Tu chehra samne karde

Main isko padh jaun

Mujhme bus ja tu

Main tujhme bus jaun

Tu aaiena dekhe or

Main nazar aaun
Tu ishara kar de 

main mar jaaun

Teri ek muskurahat pe

Kuch bhe kar jaaun

Tu har ghadi soche 

Main har pal yaad aaun

ek choti si khwaish

Tera ishq jee paaun

Tu dekhe aaiena or 

Main nazar aaun.

RO LENA/रो लेना

BAAT KAHI THI JO BHE TUMNE

SAATH TANHAYI WO SUN LENA.

KAHIN DOOR AAWAJ JO AAYE

USKE PICHE TUM CHAL DENA

SAATH TERE KOI NA HOGA 

PARCHAYI OR MERI YAADEN

YAADON KE AANGAN MAIN JAAKAR

BAAT PURANI FIR KEH DENA

DEKH TUMHE RONA AAYEGA

BIKHRE MOTI WADON WALE

EK EK CHUNKAR CHAHO TO

APNE PAAS SANJO LENA

KABHE FIR SE YAAD JO AAYE 

RAIT BHARI IN AANKHON MAIN

BIN PANI KE AB RO LENA

VAIBHAV 


बात कही थी जो भी तुमने 

साथ तन्हायी वो सुन लेना

कहीं दूर आवाज जो आये

उसके पीछे तुम चल देना

साथ तेरे कोई ना होगा 

परछाई और मेरी यादें 

यादों के आँगन में जाकर 

बात पुरानी फ़िर केह देना

देख तुम्हे रोना आयेगा 

बिखरे मोती वादों वाले 

इक इक कर चाहो तो 

अपने पास संजो लेना

कभी फ़िर अब याद जो आये

रेत भरी इन आंखो में

बिन पानी के रो लेना…

वैभव सागर

Mohabbat ho jaye -2

Hum chahte hi nahi ki muhabat ho jaye,
karogi muhabat to chere pe udasi chayegi,
jo chayegi udasi tujhe,
nind na aayegi to chere pe asar aayega,
chere pe asar aayega to tum najare churaogi ,
phir na jane kab tak mujhse milne na aaogi,
tum milne na aao mujhase aaisi nobat hi kyon
aaye,
hum chate hi nahi muhabat ho jaye
Karogi muhabat to kuch yun muhabat hogi,
kabhi sak hoga mujh pe kabhi sikayat hogi
jinse vasta nahi adavat hogi,
sahar se nafrat duniya se bagawat hogi,
mera naam lekar log tujhe bulayge,
en harkato se ek din ukta jaogi,
mujhe pathar ki tarha thukra jaogi,
tum thukrao mujhe aaisi nobat hi kyon aay hum ,
Krogi muhabat to roz mulakat hogi,
waqt jaya hoga fizul baat hogi,
saam ko taane denge kuch log,
ghar phuncte-2 raat hogi,
puchenge gharwale to kya btaogi,
jhooth bologi ya khamosh ho jaogi,
soch kar din ki baato ko muskuraogi raat bhar,
nind na aayegi tumhe jagogi raat bhar,
chid chidi ho jaogi jab dost chidayge,

hum chate hi nahi muhabat ho jaye
hum sah jayege tum na sah paogi,
kaise zamane ke sitam uthaogi,
samajayege gharwale to mujh se khafa ho jaogi,
main tanha rah jauga tum bewafa ho jaogi,
tum ho jao bewafa aaisi nobat hi kyon aaye,
hum chate hi nahi muhabat ho jaye