माँ

कल रात वापिस आने पर व्हाट्सएप्प चेक किया ना

तो कितने ही मैसेज ग्रुप्स में और कितने ही स्टेटस

सभी ने अपनी माँ की तस्वीर लगा रखी थी

कल मदर्स डे था ना माँ यानी तुम्हारा दिन

पर माँ मेरा तो रोज ही होता है न एक दिन फिर क्यों

मैं और मेरा हर दिन तो तुम्हारा है न माँ जबसे

छोटा सा मैं और बड़ी मेरी जिद्द को तुम शांत करती थी

रोते यूँ ही कई दफा सो जाया करता था तुम्हारी गोद में

तुम्हारा भी तो हर दिन मेरे लिए होता था ना माँ

झूठी कहानियां सुना कर मुझे खाना खिलाती थी तुम

कई बार डांट देती रोऊँ तो सीने से लगा लेती थी

मेरे हर दर्द को अपना बना के सहा है न माँ

सही गलत की पहचान तो मुझे तुमसे ही मिली थी

मेरे दुखी होने से पहले जान लेना तेरा

या मेरी तबियत खराब होने पर रात रात जागना

मेरा खुदसे भरोसा उठ जाए पर तुम्हारा मुझसे नहीं

कई बार देखा है कई रूप में देखा है तेरा प्यार

कभी चाची, मौसी, दादी, बुआ, दीदी ,भाभी कभी खुद

पर हर बार कुछ नया मिलता है तुमसे मुझे न माँ

कहते हैं समझने लगा हूँ मैं सब मुझे लगता है

पर आज भी तेरे लिए वही नासमझ हूँ न माँ

मिलने पे घंटो जो तुम समझाती हो
उदास बैठु तो तभी फ़ोन करती हो

बिना बोले सब समझ जाती हो
मैं मुकर जाता हूँ ना माँ
पर तुम तो सब जानती हो।।।।।
लव यू माँ।।।। मेरा हर दिन आपका है।।।।

।।।वैभव सागर।।।

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आज की शकुन्तला

कही कभी मिल जाती है
आज भी शकुन्तला कोई ।।।
जो दुष्यन्त के ख्यालों में
रहती है अपनी सुध खोयी
वापस आने की आहट में
में दिन रातें निगाहें रोयी
या याद किया करती हैं
उसकी दी हुई निशानियां
वो पहली बार मिले जंगल
और बनती वो कहानियां
कितने सपने समेटे हुए
कई रातें फिर ना सोयी
कहीं कभी मिल जाती है
आज भी शकुन्तला कोई।।।
जो दुहाई देती है अपने
प्यार और हर निशानी की
समाज से डरती है आज
कल के दुर्वासा की वाणी सी
पर न मिलता है न्याय उसे
ना मिला ही दुष्यन्त कोई
यूँ डरती फिरती है वो
सहमी सहमी खोयी खोयी
कहीं कभी मिल जाती है
आज भी शकुन्तला कोई।।।
निशानी मिली देख दुष्यन्त
वो याद सबकुछ आ गया
मिलने जा पहुंचा वहां
और भरत को भी पा गया
पर आज का दुष्यन्त
सारी यादों को दफना गया
और सवाल उठा फिर से
शकुन्तला फिर है रोई
कहीं कभी मिल जाती है
आज भी शकुन्तला कोई ।।।।।।।

RE:-मोहब्बत नाम हो जाये

After a hard time again ,I am  inspired by reading aastha gangwar Posts and by call and texts of mayank bhai .Thank you . . और आपलोगों के लिये खास मोहब्बत नाम हो जाये. . .

तेरे इश्क में मेरा ये इल्जाम हो जाये जो देखूँ तुझको तो मोहब्बत नाम हो जाये

तुझे ढूँढू दर-ब-दर और पालूँ सपनों में ना खोना चाहूँ बस रहना साथ मेरे

तेरी आंखोँ में जो देखूँ आईना नज़र आये तुम्हारी मासूमियत का भी मोहब्बत नाम हो जाये

तेरी जुल्फें तेरी आंखेँ तू और तेरी बातें मुझे याद आती है तेरे जाने पे तेरी साँसें

तेरी आवाज से मिलकर मेरे अल्फाज गीत बन जाये

दो चार बातें फ़िर करलुं  चर्चे दिवाने आम हो जाये हमारी दीवानगी का भी मोहब्बत नाम हो जाये

तू चले , मैं धूल बनू उड़ जाऊँ हवाओं में तुझसे

तेरी एक छूवन का एहसास मेरे रोम रोम में बस जाये

तुझको रब मान माँगू तुझी से तू मिल तो ख्वाब मुकम्मल हो जाये

जो तुम हसने लगों बातों से मेरी दो पल यहीं पर रुक जाये

तुम मुझमे मिल जाओ ऐसे की मोहब्बत नाम हो जाये

कभी मेरी किताबों के भी पन्ने चार तुम देख लेना

हमारे मिलने की बातें कभी  सरेआम तुम कह देना

थोडा मैं बदनाम हुँ इश्क में थोडा तू भी बदनाम हो जाये

हमारे खूबसूरत इश्क का फ़िर मोहब्बत नाम हो जाये. . .

To be continued. . .

वैभव सागर

मोहब्बत नाम हो जाये

After a hard time again ,I am  inspired by reading aastha gangwar Posts and by call and texts of mayank bhai .Thank you . . और आपलोगों के लिये खास मोहब्बत नाम हो जाये. . .

तेरे इश्क में मेरा ये इल्जाम हो जाये जो देखूँ तुझको तो मोहब्बत नाम हो जाये

तुझे ढूँढू दर-ब-दर और पालूँ सपनों में ना खोना चाहूँ बस रहना साथ मेरे 

तेरी आंखोँ में जो देखूँ आईना नज़र आये तुम्हारी मासूमियत का भी मोहब्बत नाम हो जाये

तेरी जुल्फें तेरी आंखेँ तू और तेरी बातें मुझे याद आती है तेरे जाने पे तेरी साँसें

तेरी आवाज से मिलकर मेरे अल्फाज गीत बन जाये

दो चार बातें फ़िर करलुं  चर्चे दिवाने आम हो जाये हमारी दीवानगी का भी मोहब्बत नाम हो जाये

तू चले , मैं धूल बनू उड़ जाऊँ हवाओं में तुझसे 

तेरी एक छूवन का एहसास मेरे रोम रोम में बस जाये

तुझको रब मान माँगू तुझी से तू मिल तो ख्वाब मुकम्मल हो जाये

जो तुम हसने लगों बातों से मेरी दो पल यहीं पर रुक जाये

तुम मुझमे मिल जाओ ऐसे की मोहब्बत नाम हो जाये

कभी मेरी किताबों के भी पन्ने चार तुम देख लेना 

हमारे मिलने की बातें कभी  सरेआम तुम कह देना

थोडा मैं बदनाम हुँ इश्क में थोडा तू भी बदनाम हो जाये

हमारे खूबसूरत इश्क का फ़िर मोहब्बत नाम हो जाये. . . 

To be continued. . . 

वैभव सागर

रात अधूरी बीत गयी

कुछ दाने है बिखरे मनके 

क्यू रात अधूरी बीत गयी 


जो बात छुपी थी मेरे मन में

वो बात अधूरी बीत गयी 

टपक पडे आंखोँ से मोती

सारा रंग उनमें धो डाला

कुछ रंग मिला बेरंग सही 

और याद निगोडी बीत गयी

कितना कुछ था कहने को 

और रात निगोडी बीत गयी

अब तुम बिन मैं कैसा हुँ 

बस तारों के जैसा हुँ 

है साथ सभी सपने मेरे 

पर मंज़िल आते भोर हुइ

हो रात मेरी तुम काली शायद 

हर बार तुम्हारी जीत हुइ

कितना कुछ था कहने को 

और रात निगोडी बीत गयी

कुछ वादें थे हमको करने 

कुछ लम्हे साथ बिताने थे

उलझा के नैनों को तुझमे 

हमको सरग़म बनाने थे

पर रात हमारी सौतन थी

दो घडी में ही बीत गयी 

हम मिल न सके देखो फ़िर 

क्यू रात अधूरी बीत गयी. . .

बहुत कुछ बोलती है आंखे

बहुत कुछ बोलती है आंखे

जो तुम सुन सको अगर 

इशारों में तोलती है आंखे

जो समझ सके अगर 

नूरानी ख्वाबों के साये

लिये कयी अरमाने दिल 

कुछ गहरा सा साजिश 

घोलती है आंखे

बहुत कुछ बोलती है आंखे

तुम्हारे सागर का किनारा 

कहीं डुबा सा है इनमे 

लिये सैलाब है कोई या 

लहरों की सरगमें 

कहीं कश्ती को किनारा 

इनमे नही मिलता 

खुद खो कर पार

लगाती है आंखे

बहुत कुछ बोलती है आंखे

ये काजल जो लगी इनमे 

इससे शामें उधार लूँ 

तेरे नैनो में देख

जिन्दगी गुजार दूँ

कही नैनो का इशारा

नैनो से हो जाये तो 

नैनो से तोलती है आंखे

बहुत कुछ बोलती है आंखे.

वैभव  सागर

Muskurahat mujhe de do

Choti si ek aadat mujhe de do

Tum apni muskurahat mujhe de do

Main apni baten sari

Fir tumse kahungaa

Tum sunne bhar ki 

mohlat mujhe de do

Ek choti si aadat mujhe de do

Tum apni muskurahst mujhe de do

kayi baar manga hai

Jamane bhar ki khusiyaan

Intezaar ke bhe hai 

Kuch thodi chand ghadiyaan

aao saath baitho ek nazar de do

Choti si ek aadat mujhe de do

Tum apni muskurahat mujhe de do

Padhne do tere chehre ko

Ye ada ye banawat mujhe de do

Dhup sunahri ab satane lagi hai

apni julfon ka ghunghat de do

choti si ek aadat mujhe de do

tum apni muskurahat mujhe de do

तू देखे आइना और मैं नज़र आऊँ 

तेरी रूह में मैं कुछ यूँ उतर जाऊँ 

तू देखे आईना और मैं नज़र आऊँ 

तेरी हर ख्वाहिस अपनी दुआ मानकर 

तेरे नैनो में खो जाऊँ और खोकर मुझमे 

तू देखे आईना और मैं नज़र आऊँ 
तू चाहे बारिश मैं बरस जाऊँ 

हवा बनकर मैं तेरी जुल्फें सेहलाऊँ

तू चेहरा सामने कर मैं इसको पढ जाऊँ

मुझमे बस जा तू मैं तुझमे बस जाऊँ

तू देखे आइना और मैं नज़र आऊँ 
तू इशारा कर दे जो मैं मर जाऊँ 

तेरी इक मुस्कुराहट पे कुछ ऐसा कर जाऊँ 

तू हर घडी सोचे मैं हर पल याद आऊँ 

एक छोटी ख्वाहिस तेरा इश्क जी पाऊँ 

तू देखे आइना और मैं नज़र आऊँ.

Vaibhav sagar

teri rooh main mai

Kuch yun utar jaaun

Tu dekhe aaina or

Main nazar aaun

Teri har khwaish 

Apni dua mankar

naino main kho jaaun

Or khokar mujhme 

Tu dekhe aaiena or

Main nazar aaun
Tu chahe baris 

Main baras jaun

Hawa bankar main

Teri julfen lahraun

Tu chehra samne karde

Main isko padh jaun

Mujhme bus ja tu

Main tujhme bus jaun

Tu aaiena dekhe or

Main nazar aaun
Tu ishara kar de 

main mar jaaun

Teri ek muskurahat pe

Kuch bhe kar jaaun

Tu har ghadi soche 

Main har pal yaad aaun

ek choti si khwaish

Tera ishq jee paaun

Tu dekhe aaiena or 

Main nazar aaun.