गुमनाम गाँव

मेरे नाम के चर्चे जमाने आम होते हैं 

तो फ़िर ये गाँव क्यू मेरा यहाँ गुमनाम रह जाये

कयी बातें कयी यादें जुड़ी है गाँव से मेरे 

तो फ़िर ये गाँव क्यू मेरा महज इक नाम रह जाये

यहाँ एक नदी गुजरती है जिसके दो बेसब्र किनारे हैं 

किनारों पे अगर बैठो यहाँ दिलकश नज़ारे हैं 

पुरी कायनात सी हरियाली यहाँ खेतों में दिखती है 

गाँव के बिचों बीच इक सड़क गुजरती है 

कभी तुम राहगीर बनकर यहाँ से गुजर कर देखो 

थम जाओ इक पल अगर जो निगाहें थम जाये

तो फ़िर ये गाँव क्यू मेरा यहाँ गुमनाम रह जाये
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कयी बातें और कहानियाँ यहाँ सबकी जुबाँ से है 

जो तुम सुनो उनको तो सब बेजुबां से है 

अगर झांको घरो में तो लोग नही बस दिल ही मिलते है 

ये कड़वा सच और है की ठंडे चुल्हे जलते हैं 

एक मंदिर का आँगन खुला तारों की छत पीछे 

कभी तुम आओ तो बैठो अशोक की छाँव के नीचे 

जहाँ हर शाम तुमको कितने ही चेहरे नज़र आये

तो फ़िर ये गाँव क्यू मेरा यहाँ गुमनाम रह जाये
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वैभव सागर

डूब जाऊँ मैं 

है बातें तेरी एक उलझन 

उलझ तुझको निहारू मैं 

ये आंखे झील है तेरी 

जो इनमे कूद जाऊँ मैं 

तू चाहे पार कर देना

या शायद डूब जाऊँ मैं .

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तेरी लटें काली बदरी 

तेरे चेहरे पे आती है 

तू बार बार सवारे इसे 

ये खुली खुली इठ्लाती है 

अदाओं पे सवर जाऊँ मैं 

तू चाहे पार कर देना

या शायद डूब जाऊँ मैं 

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उभरे हुए हैं गाल तेरे 

और सुर्ख गुलाबी होंठ 

खिलखिलाती तेरी हँसी 

थोडी पागल वाली सोच 

जिनमे टूट बिखर जाऊँ मैं 

तू चाहे पार कर देना 

या शायद डूब जाऊँ मैं .

©वैभव सागर

वो अनकहा सा प्यार -1

​पहला दिन पहली नज़र 

मासूम हँसी और 

दिल का मेरे इकरार

वो अनकहा सा प्यार

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बातें हुइ चंद यादें हुइ 

कुछ खोया खोया लगता था

मुझमे ही तो थी मैं पर

मन सोया सोया रहता था

मुझे झ्झोडा जिसने वो था

एक शर्मीला मेरा यार 

वो अनकहा सा प्यार 

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था फर्ज हिलोरे मारता

वतन की मोहब्बत कौन जानता

आन्धियां चली मेरे मन में

वो जा रहा था दुर कहीं 

बस आँसू ही थे बिछडन में

थी बातें जुबान पर कयी

पर लब खुल ना पा रहे

बस इतना तो पूछूँ मैं 

“सच मुझे छोडकर जा रहे?”

दिलों में था जो इंकार 

वो अनकहा सा प्यार

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पलट के भी ना देखना

आँसुओं की कीमत पायी है 

है कोरा सच ये बिल्कुल

इसमे थोडी रुसवाई है 

अगर पलटी मैं या पलटा वो

तो शायद सब थम जाता

जी लेते मिलकर हम 

तो क्युँ ना पलटू इक बार

ये था अनकहा मेरा प्यार
वैभव सागर

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.Story by :- kajal singh

Poem by :- vaibhav sagar 

इक पगली लड़की है

है राह नही ना ही मंज़िल 

बस राही मेरी दोस्त है वो 

एक झल्ली सी लड़की है 

सब पूछे तेरी कौन है वो

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अफ़साने कितने अंजाने हैं 

कुछ नये हैं  कुछ पुराने हैं

कुछ बनते बनते बन जाते

कोई कहते कहते पूछे वो 

इक लड़की देखी थी पागल 

मुझको बता तेरी कौन है वो 

है जबाब नहीं इन सवालों का

बस इक लाचारी सी लगती है 

पर उस पगली की बातें फ़िर 

इन सब पर भारी लगती है 

है नासमझी की हर हद वो

जो बैठ कभी समझूँ उसको 

खुदसे पूछूँ मेरी कौन है वो

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जब चाहत की बातें आती हैं 

मेरे सर की नस दुख जाती है 

नासमझ मुझे समझाती है 

मैं बातों में बहका जाता हुँ 

और पागल मुझे बेहकाती है 

है दुनियादारी की सारी समझ 

दुनियां के लिये अन्जान है वो 

तू इससे पहले फ़िर पूछे की 

मुझसे मेरी ही पहचान है वो 

तूने जो पगली लड़की देखी है

मेरी दोस्ती का प्यारा नाम है वो . . .

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वैभव सागर

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yes, a boy and a girl can be a good friend… 

All we need to change our mind and our thoughts, just respect as a girl and treat as a friend.

Note it down that one good friend is beeter then 1000 sham friends.

Sanwali si ladki

Ek sanwali si ladki thi
Jo mujhko bhati thi aksar
Kuch yun budbudati thi
Bagal se mere jugarne per
Dabe pair aati thi aksar.
Kuch kitaben jo saath thi
Unme kho jati thi wo aksar
Kaye dost the uske bhe
Sayad kisi ne pucha hoga
Aankhe uski bhe jheel si thi
Sayad he koi duba hoga
Yun adar adhar muskati thi
Jo gum ho jati thi aksar
Ek sanwali si ladki thi
Wo mujhko bhati thi aksar
Ek baar jo bateen chaar hue
Fir hone lagi bateen Akasar
kehne ko bechain thi wo
Sunne ko bekrar main aksar
Na keh payi na he sun paya
Karne ko intezar ab aksar
Kaye baar yaad aati hai wo
Karne ko bekrar ab aksar
Kuch unkaheen kahai thi
Wo ek sanwali si ladki thi
Sayad main deewana tha
Ya sayad wo deewani thi…

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Ooopppsss, wait  i know ye better ho sakta tha ya hai but yaar two minutes main kya likhu. Fir bhe hope next time after exam i ll edit this one for you gyes.

Presenting all new ek sanwali si ladki by me means by vaibhav sagar.
Haan poem ka sayad he koi sanyog ho meri life se.   .
So just read and enjoy..

अब भी वो रो पड़ती होगी

छुप छुप के कही पोस्ट
मेरी पढती होगी,
मेरी तस्वीरों से तंहाई मे
लड़ती होगी ,
जब भी मेरी याद उसे
आती होगी,
लगता है अब
भी वो रो पड़ती होगी,
.
किसी दुजे नाम से फेसबुक पे आई
होगी,
ID कोई fake जरूर बनाई होगी,
कोई मुझमें कमी निकाले
तो वो चिड़ती होगी,
लगता है अब
भी वो रो पड़ती होगी,
.
मेरा हर अपडेट उसे अब
भी युंही भाता होगा,
मेरा अक्स सामने उसके आ ही जाता होगा,
जब भी कोई बात
उसकी बिगड़ती होगी,
लगता है अब
भी वो रो पड़ती होगी,
.
लगी मेरी गजलों की लत
वो कैसे छुटेगी,
डरते -डरते रिक्वेस्ट मुझे भेजी होगी,
क्युं छोड़ा मुझे कहकर खुद से
झगड़ती होगी,
लगता है अब
भी वो रो पड़ती होगी,
.
काश कहीं फिर से मिल जाए मुझे,
आकर फिर वही प्यार की बात चलाए
मुझे,
सोच यही मंदिरों में
माथा रगड़ती होगी,
लगता है अब
भी वो रो पड़ती होगी….

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By : Vaibhav Sagar

Kuch to hai tu badal gaya hai

Wo teri ankhon k khawb sary wo batin sari hisab sary swal sary
Jwab sary
Wo khushain sari
Azab isary
nsha tha jo wo utr giya hy,
.
KUCH TO HAI TU BADAL GYA HAI!

Jo tery milny ki arzo thi
Jo tujko pany ki justju thi
Hui jo chahat abi shuro thi
Jo teri ankhon main roshni thi jo teri baton ki rangini thi
Jo teri sanson ki tazgi thi
Jo try lehjy main chashni thi wo sra meetha pighal gya hy
.
KUCH TO HY TU BDAL GYA HY’

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By : Vaibhav Sagar

तेरी तुझी से लड़ाई हो

ज़माने भर से हो रंजिश, घटा कैसी ही छाई हो,
मजा तो तब है तेरी जब, तुझी से ही लड़ाई हो,   
सितारे गर्दिशो में हो, मुकद्दर हाशिये पर हो ,
रहे इम़ा तेरा सच्चा, की जब जब सर उठाई हो,    
हो जब ये हौसला तेरा, मुसलसल कारवां तेरा,
हो शोले आंख में तेरे, मशालें जब जलाई हो , 
क़यामत से तू ले लोहा, खुदा भी देखता होगा,
अजानो में मगर तेरे उसी की ही खुदाई हो,        
नहीं मुमकिन तेरा दिलवर हमेशा साथ हो तेरे ,
असल जज्बा मुहब्बत का मुहब्बत में जुदाई हो,      
ज़माने भर से हो रंजिश, घटा कैसी ही छाई हो,
मजा तो तब है तेरी जब, तुझी से ही लड़ाई हो  . 

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Shayaron main naam…

Agar tapakta Ashkon ki jagah Lahoo aankhon se…

Koi kisi ko phir shayed hi rulaata…
Dil ke tootne ki hoti jo Awaaz…

Too tumhein mere dard ka andaza ho paata…

Yaadein jo na aati yoon khamoshi se chupke chupke…

To mere ghar ki Raunaq hoti teri mehfil se bhi zyada…

Na hota agar chaand mein daag…

Teri khubsoorti ka mujhe tod mil jata…

Agar karta na waqt kisi se bewafaai…

To shayron mein mera naam kahan se aata….

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Vaibhav sagar

#66

Rait bhari h ankho me aansu se tum dho lena
Koi sukha ped mile toh usse lipat kar ro lena,
Kuch to rait ki pyas bujhao, janam-2 ki pyasi h
Sahil k dhalne se phele apne paau bhigo lena,
Mene dariya se sikhi hain pani ki pardadari,
Upar upar hanste rehna gehrayi mein ro dena

Vaibhav

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