#101

when i look at you, I see this perfect personThen there’s me. This weird crazy person with all these problems and i dont see how You chose me. BUT please just stay . Forever. . . 

Love the way

I love the way you smile

Love the way you say it

I love that unique style

Love that word “don’t know”

and after that your wraped face

To which i always wanna kiss

The pink and gray your lips

And your anger with that ego

Attitude makes you perfect to go

For a long journey of life with me

I promise i ll never flee

To the way you care for me

And all the day you miss me

That word love you won’t accepts

And long long gossips .

i love the way you say that

You were are will be there for me

Since for whenever i need.

So, i found the reason to trust you more

To miss you more 

and the way you love me

I love that way more.

.

©vaibhav sagar

आओ एक शाम बैठो नदी के किनारे 

आओ एक शाम बैठो नदी के किनारे 

जो है तो बेवजह आओ वक़्त गुजारे 

मैं बातें फिर सारी तुम्हारी करूँगा 

तुम मुझको सुनती जाना 

मैं तेरे मन की कहता जो जाऊं

तुम मेरा मन भी पढ़ती जाना 

इठलाना और मुझसे दूर भागना

और तेरे पीछे मैं दौडूं तेरा नाम पुकारे 

आओ एक शाम बैठो नदी के किनारे

.

जो चाहो तो भर लेना मुझको बाहों में अपनी 

या फिर यूँ ही मेरी ओर देख मुस्कुराना 

की आँखों के इशारे तेरे पढ़ जो लूंगा

तूम मन ही मन सब कहती जाना 

या गर चाहो जो तो मैं दूर नज़र आऊं

पर क्या होगा गर घबराहट मेरी बातें बिगाड़े

आओ एक शाम बैठो नदी के किनारे

.


तेरी अधरें जो कांपी तो अपनी से छु लूंगा 

 हमारे मिलने की बातें सरेआम कह दूंगा 
और तुम मेरे लब पे अपने लब रखो 

की ऐसी रिसवत जो मुझे चुप कराये 

कोई पूछे तेरी हालात तो मेरा नाम दो बताये 

और अगली बार मिलने घंटो खुद को सवारे

आओ एक शाम बैठो नदी के किनारे । । ।

©वैभव सागर 

#100

बेवजह बातें हमारी तुम्हारी 

मैं तुमको सुनते जाता हूँ

तुम मुझको सुनती जाती हो

मेरे बहुत सवालों का तुम 

एक जबाब दे पाती हो

ये कुछ नहीं तेरा मेरा 

कितना कुछ होता है ना ।

वैभव सागर 

तू मुझसे वाकिफ मैं तुझसे वाकिफ

इक धुप दोपहरी मिलने आना तेरा 

और अंजाम से मैं वाकिफ 

वो मुरझाये गुलाब के फूल तेरे

और उनको चुपके से थमाना तेरा

की उसकी जान से मैं वाकिफ 

खुदको परेशान कह कह के 

मुझको यूँ तड़पाना तेरा 

फिर खुलके हंसना 

या मुस्कुराना तेरा

उस मुस्कान से मैं वाकिफ

तेरी बातें बहुत सारी

कुछ अल्हड सी और कुछ प्यारी

और उनको सुनते जाना मेरा

तेरी हर बात से मैं वाकिफ

कभी मेरी बातों की भी 

तुम तस्वीर बना लेती होगी 

तुम मेरी इश्क़ से वाकिफ

मैं तेरे इश्क़ से वाकिफ

कितनी ही दफा तेरा मैं 

नाम पुकारा करता हूँ

तू मेरी रग रग से वाकिफ

मैं तेरे नाम से वाकिफ । । ।

वैभव सागर

गुमनाम गाँव

मेरे नाम के चर्चे जमाने आम होते हैं 

तो फ़िर ये गाँव क्यू मेरा यहाँ गुमनाम रह जाये

कयी बातें कयी यादें जुड़ी है गाँव से मेरे 

तो फ़िर ये गाँव क्यू मेरा महज इक नाम रह जाये

यहाँ एक नदी गुजरती है जिसके दो बेसब्र किनारे हैं 

किनारों पे अगर बैठो यहाँ दिलकश नज़ारे हैं 

पुरी कायनात सी हरियाली यहाँ खेतों में दिखती है 

गाँव के बिचों बीच इक सड़क गुजरती है 

कभी तुम राहगीर बनकर यहाँ से गुजर कर देखो 

थम जाओ इक पल अगर जो निगाहें थम जाये

तो फ़िर ये गाँव क्यू मेरा यहाँ गुमनाम रह जाये
.

Click here to listen this poem in the voice of vaibhav sagar

.

कयी बातें और कहानियाँ यहाँ सबकी जुबाँ से है 

जो तुम सुनो उनको तो सब बेजुबां से है 

अगर झांको घरो में तो लोग नही बस दिल ही मिलते है 

ये कड़वा सच और है की ठंडे चुल्हे जलते हैं 

एक मंदिर का आँगन खुला तारों की छत पीछे 

कभी तुम आओ तो बैठो अशोक की छाँव के नीचे 

जहाँ हर शाम तुमको कितने ही चेहरे नज़र आये

तो फ़िर ये गाँव क्यू मेरा यहाँ गुमनाम रह जाये
.

वैभव सागर

#99

झूठ में वो सच ना कहना

अल्फाज़ मुकम्मल मिल जाये

इक बूँद गिरे दिल के अंदर 

तेरे नाम पे सारा बह जाये.

©vaibhav sagar

Jhuth main bhe wo sach na kehna

Alfaaz mukammal mil jaaye

Ek boond gire dil ke andar

Tere naam pe sara beh jaaye .

.

डूब जाऊँ मैं 

है बातें तेरी एक उलझन 

उलझ तुझको निहारू मैं 

ये आंखे झील है तेरी 

जो इनमे कूद जाऊँ मैं 

तू चाहे पार कर देना

या शायद डूब जाऊँ मैं .

.

तेरी लटें काली बदरी 

तेरे चेहरे पे आती है 

तू बार बार सवारे इसे 

ये खुली खुली इठ्लाती है 

अदाओं पे सवर जाऊँ मैं 

तू चाहे पार कर देना

या शायद डूब जाऊँ मैं 

.

उभरे हुए हैं गाल तेरे 

और सुर्ख गुलाबी होंठ 

खिलखिलाती तेरी हँसी 

थोडी पागल वाली सोच 

जिनमे टूट बिखर जाऊँ मैं 

तू चाहे पार कर देना 

या शायद डूब जाऊँ मैं .

©वैभव सागर