#119

मुन्तज़िर* हूँ की ये रात निकल जाएगी

अकेले रो लूँ तो दिल की बात निकल जाएगी

ए दोस्तों न दिया गया जबाब तुम्हारी बातों का

जो कहीं लब खुले तो बरसात निकल जाएगी।।।

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#118

हर बात पे तेरे यूँ मुस्कुराने की अदा
छिप के छिपा के नज़रे मिलाने की अदा
और तुमको लगता है तुम खूबसूरत हो
यहाँ रहते सभी लड़को की आखिरी जरुरत हो..तो सुन लो..
तो सुन लो ये ग़लतफहमी तेरी
की सब तुमको देखा करते हैं
या फिर आँखे सेका करते हैं

बोलते बोलते भौहों को उठाने की अदा
बीच बीच में तेरे ये शर्माने की अदा
और थोड़ी देर में जो घड़ी देखती हो
की तुमको लगता है आखिरी मोहब्बत हो
तो सुन लो..
तो सुन लो ये बेकरारी तेरी
या फिर तेरा है सस्ता नशा
की सब तुमको देखा करते हैं
या आँखे सेका करते हैं।।।

बात की बात

बात की बात में बात ही चली गई
यूँही मुलाकातों में रात ही चली गई
जो बात जुबाँ पे थी आके रुकी कबसे
लहरों उठी तो वो बात ही चली गई
सवेरा जब हुआ हुई तलाश रात की
रात में जो बात थी वो बात ही चली गई ।।।

#113

वो तो अपना दर्द रो रो कर सुनाते रहे,

हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे,

हमें ही मिल गया खिताब बेवफा का क्योंकि

हम हर दर्द मुस्कुराकर छुपाते रहे।।।।।।।