#120

तेरी तस्वीर जो दिल से लगी थी

उसको सहलाना छोड़ दिया

जो मैंने दिल लगाना छोड़ दिया

तो तुझे मनाना छोड़ दिया

तेरी बातें जो साथ थी मेरे हमेशा

उसे दोहराना छोड़ दिया

तोहफे तेरे दिल जला रहे थे

अब उसे बुझाना छोड़ दिया

जा तू किसी और की हो ले यहाँ

अब आंसू बहाना छोड़ दिया

जो मैंने दिल लगाना छोड़ दिया

तो तुझे मनाना छोड़ दिया।।

वैभव सागर

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#119

मुन्तज़िर* हूँ की ये रात निकल जाएगी

अकेले रो लूँ तो दिल की बात निकल जाएगी

ए दोस्तों न दिया गया जबाब तुम्हारी बातों का

जो कहीं लब खुले तो बरसात निकल जाएगी।।।

बात की बात

बात की बात में बात ही चली गई
यूँही मुलाकातों में रात ही चली गई
जो बात जुबाँ पे थी आके रुकी कबसे
लहरों उठी तो वो बात ही चली गई
सवेरा जब हुआ हुई तलाश रात की
रात में जो बात थी वो बात ही चली गई ।।।

#113

वो तो अपना दर्द रो रो कर सुनाते रहे,

हमारी तन्हाइयों से भी आँख चुराते रहे,

हमें ही मिल गया खिताब बेवफा का क्योंकि

हम हर दर्द मुस्कुराकर छुपाते रहे।।।।।।।