ना करो

मेरे दोस्त जल जाते है
युं बाहों में समाया न करो

बरस जाती है बदरी कालि
आंखों में काजल लगाया न करो

फिज़ायें भी करने लगी शिकायत
घनी जुल्फे बिखराया न करो

मौसम भी देखो लगा रंग बदलने
पलकों को धीरे उठाया ना करो

फूलों को भी आने लगी अब शरम
अपनी लबों को युं दबाया न करो

सागर भी रहने लगा प्यासा देखो
नज़रो से सबको पिलाया ना करो

दिल थाम लेते हैं आशिक सभी
हमे दिल में बसाया न करो

बस अब बन जाओ जान मेरी
युं सबको तड़पाया न करो. . . .

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Vaibhav

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